ब्रेक-ईवन पॉइंट क्या है?
ब्रेक-ईवन वह बिक्री है जिस पर कुल कमाई ठीक कुल ख़र्च के बराबर होती है – न नफ़ा, न नुक़सान। उससे कम बिक्री पर घाटा, ज़्यादा पर मुनाफ़ा। हर नए कारोबार, दुकान या प्रोडक्ट के लिए यह पहला सवाल होना चाहिए: “महीने में कितना बेचना पड़ेगा?”
फ़ॉर्मूला
ब्रेक-ईवन यूनिट = फ़िक्स्ड ख़र्च ÷ (प्रति यूनिट दाम − प्रति यूनिट परिवर्तनशील लागत)
दाम में से परिवर्तनशील लागत घटाने पर जो बचता है, उसे कंट्रीब्यूशन कहते हैं – हर बिक्री फ़िक्स्ड ख़र्च चुकाने में इतना योगदान देती है। ब्रेक-ईवन बिक्री (रुपये में) = फ़िक्स्ड ख़र्च ÷ कंट्रीब्यूशन मार्जिन अनुपात। चाहा गया मुनाफ़ा हो तो उसे फ़िक्स्ड ख़र्च में जोड़कर वही फ़ॉर्मूला लगाएँ।
उदाहरण: टिफ़िन सर्विस
एक टिफ़िन सर्विस का महीने का फ़िक्स्ड ख़र्च ₹60,000 है (रसोई का किराया, दो लोगों की सैलरी, गैस कनेक्शन वग़ैरह)। एक थाली ₹250 में बिकती है और उसका कच्चा माल, पैकिंग और डिलीवरी ₹100 का पड़ता है। हर थाली ₹150 का योगदान देती है, इसलिए ब्रेक-ईवन = 60,000 ÷ 150 = 400 थाली महीना, यानी रोज़ लगभग 14 थाली (30 दिन)। महीने में ₹30,000 का मुनाफ़ा चाहिए, तो (60,000 + 30,000) ÷ 150 = 600 थाली।
| स्थिति | प्रति थाली योगदान | ब्रेक-ईवन थाली |
|---|---|---|
| शुरुआती स्थिति | ₹150 | 400 |
| दाम ₹275 | ₹175 | 343 |
| प्रति थाली लागत ₹90 | ₹160 | 375 |
| किराया ₹10,000 कम (₹50,000 फ़िक्स्ड) | ₹150 | 334 |
दाम में सिर्फ़ ₹25 की बढ़ोतरी ब्रेक-ईवन को लगभग 14% घटा देती है। छोटे बदलाव का बड़ा असर इसलिए होता है क्योंकि वह पूरा का पूरा कंट्रीब्यूशन में जुड़ता है।
ब्रेक-ईवन घटाने के तीन रास्ते
- दाम बढ़ाएँ – बाज़ार अनुमति दे तो सबसे असरदार।
- परिवर्तनशील लागत घटाएँ – थोक में ख़रीद, कम बर्बादी, सस्ती पैकिंग, फ़ूड ऐप पर निर्भरता कम करके सीधे ऑर्डर लेना।
- फ़िक्स्ड ख़र्च घटाएँ – छोटी जगह, साझा रसोई या पार्ट-टाइम स्टाफ़।
सीमाएँ
हिसाब मानता है कि दाम और प्रति यूनिट लागत हर बिक्री पर एक जैसी रहती है। असल में थोक छूट, ऑफ़र और त्योहारों के मौसम से ये बदलते हैं। कई तरह के प्रोडक्ट हों तो औसत दाम और औसत लागत लें। GST में रजिस्टर्ड हैं तो सारे आँकड़े GST के बिना लें। दाम तय करने के लिए प्रॉफ़िट मार्जिन कैलकुलेटर भी देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ब्रेक-ईवन पॉइंट कैसे निकालते हैं?
फ़िक्स्ड ख़र्च को प्रति यूनिट कंट्रीब्यूशन (दाम − परिवर्तनशील लागत) से भाग दें। ₹30,000 फ़िक्स्ड ख़र्च, ₹200 दाम और ₹120 लागत पर ब्रेक-ईवन = 30,000 ÷ 80 = 375 यूनिट।
फ़िक्स्ड और परिवर्तनशील ख़र्च में क्या फ़र्क़ है?
फ़िक्स्ड ख़र्च बिक्री से नहीं बदलता – किराया, सैलरी, EMI। परिवर्तनशील ख़र्च हर बिक्री के साथ बढ़ता है – कच्चा माल, पैकिंग, डिलीवरी, कमीशन।
क्या मालिक की अपनी सैलरी फ़िक्स्ड ख़र्च में जोड़ें?
हाँ, अगर आप कारोबार से अपना घर चलाते हैं। वरना ब्रेक-ईवन पर कारोबार तो चलता दिखेगा, पर आपकी मेहनत का कोई भुगतान नहीं होगा।
आख़िरी अपडेट: 8 अक्टूबर 2026