कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- कुल प्रश्न या अंक: टेस्ट के पूरे अंक, जैसे 25 प्रश्न या 80 अंक का पेपर।
- ग़लत या सही: कॉपी जाँचते समय कटे अंक गिनना आसान होता है, इसलिए पहले से "ग़लत" चुना हुआ है। प्राप्त अंक पता हों तो "सही" चुनें। आधे अंक (जैसे 2.5) भी लिख सकते हैं।
- ग्रेडिंग पद्धति: CBSE जैसा A1 से E वाला ग्रेड, या डिवीज़न वाली पुरानी और अब भी प्रचलित पद्धति।
- राउंड करना: कुछ स्कूल 90.5% को 91% मानकर ग्रेड देते हैं; ऐसा नियम हो तो यह विकल्प चालू करें।
नतीजे के नीचे उस टेस्ट की पूरी तालिका खुलती है — 0 ग़लत से लेकर सब ग़लत तक, हर स्थिति का प्रतिशत और ग्रेड। शिक्षक इसे प्रिंट करके कॉपियाँ जाँचते समय पास रख सकते हैं।
प्रतिशत का फ़ॉर्मूला
प्रतिशत = प्राप्त अंक ÷ कुल अंक × 100। 40 प्रश्नों में 7 ग़लत हों, तो 33 सही, और 33 ÷ 40 × 100 = 82.5% — यानी A2 ग्रेड और डिस्टिंक्शन के साथ फ़र्स्ट डिवीज़न। हर प्रश्न का मान 100 ÷ 40 = 2.5% है, इसलिए हर ग़लत जवाब 2.5% घटाता है।
ग्रेड A1–E: अंकों की सीमाएँ
| प्रतिशत | ग्रेड |
|---|---|
| 91–100 | A1 |
| 81–90 | A2 |
| 71–80 | B1 |
| 61–70 | B2 |
| 51–60 | C1 |
| 41–50 | C2 |
| 33–40 | D |
| 33 से कम | E (अनुत्तीर्ण) |
यह आठ-स्तरीय पद्धति CBSE से जुड़े बहुत-से स्कूलों में आंतरिक परीक्षाओं के लिए इस्तेमाल होती है। ध्यान दें: CBSE की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में ग्रेड अंकों की इन सीमाओं से नहीं, बल्कि पास हुए छात्रों में रैंक के आधार पर दिए जाते हैं (जैसे सबसे ऊपर के 1/8 छात्रों को A1)। इसलिए बोर्ड परिणाम के लिए यह कैलकुलेटर सिर्फ़ प्रतिशत बताने के काम का है।
डिवीज़न पद्धति
| प्रतिशत | डिवीज़न |
|---|---|
| 75 और ऊपर | फ़र्स्ट डिवीज़न, डिस्टिंक्शन के साथ |
| 60–74.99 | फ़र्स्ट डिवीज़न |
| 45–59.99 | सेकंड डिवीज़न |
| 33–44.99 | थर्ड डिवीज़न (पास) |
| 33 से कम | अनुत्तीर्ण |
ये सीमाएँ कई राज्य बोर्डों और नौकरी के फ़ॉर्मों में दिखती हैं, पर हर जगह एक जैसी नहीं हैं: कुछ विश्वविद्यालयों में सेकंड डिवीज़न 48% या 50% से शुरू होती है और पासिंग 35% या 40% पर। अपने बोर्ड या विश्वविद्यालय की सीमा ज़रूर मिलाएँ।
शिक्षकों के लिए सुझाव
- निगेटिव मार्किंग: अगर हर ग़लत जवाब पर 1/4 अंक कटता है, तो पहले शुद्ध अंक निकालें (सही − ग़लत ÷ 4) और फिर उन्हें "प्राप्त अंक" में भरें।
- बोर्ड जैसा पैटर्न: सेक्शन के हिसाब से अलग अंक हों, तो कुल प्राप्त अंक जोड़कर एक साथ भरें।
- कई टेस्ट मिलाकर फ़ाइनल परीक्षा का लक्ष्य तय करना हो, तो फ़ाइनल परीक्षा अंक कैलकुलेटर देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मार्क्स से परसेंटेज कैसे निकालें?
प्राप्त अंकों को कुल अंकों से भाग दें और 100 से गुणा करें। 80 में से 62 अंक = 62 ÷ 80 × 100 = 77.5%।
फ़र्स्ट डिवीज़न कितने प्रतिशत पर होती है?
ज़्यादातर बोर्ड और विश्वविद्यालयों में 60% या उससे ज़्यादा अंक पर फ़र्स्ट डिवीज़न मिलती है, और 75% या ज़्यादा पर डिस्टिंक्शन। सटीक नियम अपनी संस्था से मिलाएँ।
CBSE में A1 ग्रेड कितने अंक पर मिलता है?
स्कूल की आंतरिक परीक्षाओं की अंक-आधारित पद्धति में 91 से 100 प्रतिशत पर A1 मिलता है। बोर्ड परीक्षा में CBSE ग्रेड रैंक के आधार पर देता है, इसलिए वहाँ कटऑफ़ हर साल अलग हो सकता है।
निगेटिव मार्किंग वाले टेस्ट का प्रतिशत कैसे निकालें?
पहले शुद्ध अंक निकालें: सही जवाबों के अंक में से ग़लत जवाबों पर कटे अंक घटाएँ। फिर "सही प्रश्न / प्राप्त अंक" चुनकर वह संख्या भरें।
आख़िरी अपडेट: 8 अक्टूबर 2026