चक्रवृद्धि ब्याज क्या है?
साधारण ब्याज सिर्फ़ मूल रकम पर मिलता है। चक्रवृद्धि ब्याज में हर बार मिला ब्याज मूल रकम में जुड़ जाता है, और अगली बार ब्याज इस बढ़ी हुई रकम पर मिलता है – यानी ब्याज पर भी ब्याज। शुरुआत में फ़र्क़ छोटा दिखता है, पर 15–20 साल में यही “पावर ऑफ़ कंपाउंडिंग” आपके जमा किए पैसे से कहीं बड़ी रकम बना देती है।
फ़ॉर्मूला
एकमुश्त रकम के लिए: A = P × (1 + r/n)n × t, जहाँ P मूल रकम, r सालाना दर, n साल में कंपाउंडिंग की संख्या और t साल हैं।
हर महीने निवेश (C) जोड़ने पर: FV = P(1 + i)m + C × ((1 + i)m − 1) ÷ i, जहाँ i मासिक दर और m महीनों की संख्या है। अगर कंपाउंडिंग मासिक नहीं है, तो कैलकुलेटर सालाना दर को बराबर मासिक दर में बदल देता है, ताकि नतीजा उसी प्रभावी दर पर बढ़े।
उदाहरण
₹1 लाख एकमुश्त और ₹5,000 हर महीने, 12% सालाना रिटर्न, 10 साल: आप कुल ₹7 लाख जमा करते हैं और रकम लगभग ₹14.8 लाख हो जाती है – यानी करीब ₹7.8 लाख सिर्फ़ रिटर्न से।
समय का असर सबसे बड़ा है। सिर्फ़ ₹5,000 महीना, 12% रिटर्न पर:
| अवधि | आपका जमा | रिटर्न | कुल रकम |
|---|---|---|---|
| 10 साल | ₹6 लाख | ₹5.5 लाख | ₹11.5 लाख |
| 15 साल | ₹9 लाख | ₹15.98 लाख | ₹24.98 लाख |
| 20 साल | ₹12 लाख | ₹37.46 लाख | ₹49.46 लाख |
| 25 साल | ₹15 लाख | ₹78.94 लाख | ₹93.94 लाख |
| 30 साल | ₹18 लाख | ₹1.57 करोड़ | ₹1.75 करोड़ |
20 से 30 साल के बीच रकम लगभग तीन गुना हो जाती है, जबकि जमा सिर्फ़ डेढ़ गुना बढ़ता है। जल्दी शुरू करना, ज़्यादा रकम डालने से भी बड़ा फ़ायदा देता है।
कंपाउंडिंग कितनी बार होती है, इससे फ़र्क़
₹1 लाख, 7% सालाना, 10 साल के लिए:
| कंपाउंडिंग | 10 साल बाद रकम | प्रभावी सालाना दर |
|---|---|---|
| सालाना | ₹1,96,715 | 7% |
| तिमाही | ₹2,00,160 | 7.19% |
| मासिक | ₹2,00,966 | 7.23% |
| रोज़ाना | ₹2,01,362 | 7.25% |
बैंक FD में ब्याज आम तौर पर हर तिमाही जुड़ता है – उसके लिए FD कैलकुलेटर देखें।
SIP और यह कैलकुलेटर
म्यूचुअल फ़ंड SIP का अनुमान लगाने के लिए “हर महीने निवेश” में SIP की रकम और “सालाना रिटर्न” में अपेक्षित औसत रिटर्न डालें। कई SIP कैलकुलेटर मानते हैं कि पैसा महीने की शुरुआत में लगता है, इसलिए उनका नतीजा यहाँ से थोड़ा ज़्यादा आता है। ध्यान रखें: शेयर बाज़ार से जुड़े निवेश का रिटर्न तय नहीं होता, कुछ साल नुक़सान भी होता है, और पिछला रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं है।
72 का नियम
पैसा कितने साल में दोगुना होगा, इसका झटपट अंदाज़ा: 72 को सालाना दर से भाग दें। 8% पर लगभग 9 साल, 12% पर लगभग 6 साल। महँगाई पर भी यही नियम लागू होता है – 6% महँगाई में क़ीमतें लगभग 12 साल में दोगुनी हो जाती हैं।
ध्यान दें: ये नतीजे योजना बनाने के लिए अनुमान हैं, वित्तीय या टैक्स सलाह नहीं। अंतिम आँकड़े बैंक के सैंक्शन लेटर और लोन एग्रीमेंट में होते हैं; बड़े फ़ैसले से पहले किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या SEBI में पंजीकृत सलाहकार से बात करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चक्रवृद्धि ब्याज का फ़ॉर्मूला क्या है?
A = P × (1 + r/n)n×t। उदाहरण: ₹10,000 पर 10% सालाना, हर साल कंपाउंडिंग, 2 साल: 10,000 × 1.1² = ₹12,100। इसमें ₹2,100 ब्याज है, जबकि साधारण ब्याज ₹2,000 ही होता।
क्या यह SIP कैलकुलेटर की तरह काम करता है?
हाँ, “हर महीने निवेश” में SIP की रकम डालें। यह कैलकुलेटर निवेश महीने के अंत में मानता है; महीने की शुरुआत में निवेश मानने वाले कैलकुलेटर थोड़ा ज़्यादा नतीजा दिखाते हैं। असली SIP रिटर्न बाज़ार पर निर्भर है।
ज़्यादा बार कंपाउंडिंग से कितना फ़र्क़ पड़ता है?
थोड़ा। 7% पर सालाना और रोज़ाना कंपाउंडिंग में प्रभावी दर का फ़र्क़ 0.25 प्रतिशत अंक से भी कम है। दर, समय और नियमित निवेश का असर इससे कहीं बड़ा होता है।
क्या महँगाई को ध्यान में रखना चाहिए?
हाँ। 20 साल बाद का ₹1 करोड़ आज के ₹1 करोड़ जितना नहीं ख़रीद पाएगा। लंबी योजना के लिए रिटायरमेंट कैलकुलेटर देखें, जो रकम को आज के रुपयों में भी दिखाता है।
आख़िरी अपडेट: 8 अक्टूबर 2026