मार्जिन और मार्कअप – दोनों अलग हैं
दुकानदारी में सबसे आम उलझन यही है। दोनों में मुनाफ़ा एक ही है (बिक्री मूल्य − लागत), फ़र्क़ सिर्फ़ इस बात में है कि उसे किससे भाग दिया जाता है:
- मार्जिन = मुनाफ़ा ÷ बिक्री मूल्य × 100 – बिक्री का कितना प्रतिशत आपके पास बचा।
- मार्कअप = मुनाफ़ा ÷ लागत × 100 – लागत पर कितना प्रतिशत जोड़ा गया।
₹400 की चीज़ ₹650 में बेची, तो मुनाफ़ा ₹250। मार्जिन = 250 ÷ 650 = 38.46%, जबकि मार्कअप = 250 ÷ 400 = 62.5%। स्कूल की किताबों में “लाभ प्रतिशत” आम तौर पर क्रय मूल्य (लागत) पर निकाला जाता है – यानी वह मार्कअप है, मार्जिन नहीं।
चाहे गए मार्जिन के लिए दाम कैसे तय करें
बिक्री मूल्य = लागत ÷ (1 − मार्जिन)
₹400 की लागत पर 35% मार्जिन चाहिए, तो दाम = 400 ÷ 0.65 = ₹615.38। सिर्फ़ लागत पर 35% जोड़ना (₹540) काफ़ी नहीं होगा – उससे मार्जिन केवल 25.93% बनेगा।
₹400 लागत पर अलग-अलग मार्जिन
| मार्जिन | बिक्री मूल्य | बराबर मार्कअप | लागत का गुणक |
|---|---|---|---|
| 10% | ₹444.44 | 11.11% | × 1.11 |
| 20% | ₹500.00 | 25% | × 1.25 |
| 25% | ₹533.33 | 33.33% | × 1.33 |
| 30% | ₹571.43 | 42.86% | × 1.43 |
| 40% | ₹666.67 | 66.67% | × 1.67 |
| 50% | ₹800.00 | 100% | × 2 |
GST और मार्जिन
अगर आप GST में रजिस्टर्ड हैं, तो मार्जिन हमेशा GST के बिना वाले आँकड़ों पर निकालें: लागत में से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) वाला GST हटाएँ, और बिक्री मूल्य में से ग्राहक से लिया गया GST। वह GST आपकी कमाई नहीं है, सरकार को जाता है। GST जोड़ने या हटाने के लिए GST कैलकुलेटर देखें।
ऑनलाइन बेचते हैं तो
Amazon, Flipkart या Meesho जैसे मार्केटप्लेस पर बेचते समय लागत में कमीशन, शिपिंग, पेमेंट गेटवे फ़ीस और रिटर्न से होने वाला नुक़सान भी जोड़ें। ये सब मिलकर बिक्री मूल्य का बड़ा हिस्सा ले सकते हैं, और जो मार्जिन काग़ज़ पर 30% दिखता है, वह असल में आधा रह जाता है।
ग्रॉस और नेट मार्जिन
यह कैलकुलेटर ग्रॉस मार्जिन निकालता है – सिर्फ़ सामान की लागत के बाद। दुकान का किराया, स्टाफ़ की सैलरी, बिजली और विज्ञापन घटाने के बाद जो बचता है, वह नेट मार्जिन है। कितनी बिक्री पर ये फ़िक्स्ड ख़र्च निकल आते हैं, यह ब्रेक-ईवन कैलकुलेटर बताएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मार्जिन और मार्कअप में क्या फ़र्क़ है?
मार्जिन मुनाफ़े को बिक्री मूल्य से भाग देता है, मार्कअप लागत से। ₹100 की चीज़ ₹150 में बिके तो मार्कअप 50% है, पर मार्जिन सिर्फ़ 33.3%। मार्जिन हमेशा मार्कअप से कम होता है।
लाभ प्रतिशत कैसे निकालते हैं?
लाभ प्रतिशत = (विक्रय मूल्य − क्रय मूल्य) ÷ क्रय मूल्य × 100। यह असल में मार्कअप है। ₹500 में ख़रीदकर ₹600 में बेचा तो लाभ 20%।
अच्छा प्रॉफ़िट मार्जिन कितना होता है?
यह धंधे पर निर्भर है। किराना और राशन में मार्जिन कम होता है और बिक्री ज़्यादा, जबकि कपड़े, गिफ़्ट आइटम या सेवाओं में मार्जिन आम तौर पर ज़्यादा रखा जाता है। अपने क्षेत्र के दूसरे दुकानदारों और अपने फ़िक्स्ड ख़र्च से तुलना करें।
आख़िरी अपडेट: 8 अक्टूबर 2026