50/30/20 नियम क्या है?
यह बजट बनाने का सबसे आसान तरीक़ा है। हाथ में आने वाली सैलरी को तीन हिस्सों में बाँटें:
- 50% ज़रूरतें – किराया या होम लोन की EMI, राशन, बिजली-पानी-गैस, मोबाइल और इंटरनेट, बच्चों की स्कूल फ़ीस, आने-जाने का किराया, बीमा प्रीमियम और बाक़ी लोन की EMI।
- 30% इच्छाएँ – बाहर खाना, ऑनलाइन शॉपिंग, OTT सब्सक्रिप्शन, घूमना-फिरना, नए गैजेट और त्योहारों की अतिरिक्त ख़रीदारी।
- 20% बचत और क़र्ज़ चुकाना – इमरजेंसी फ़ंड, SIP, PPF, RD, और क्रेडिट कार्ड या लोन की अतिरिक्त अदायगी।
कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें
अपनी मासिक इन-हैंड सैलरी डालें – CTC नहीं, बल्कि TDS, EPF और प्रोफ़ेशनल टैक्स कटने के बाद खाते में आने वाली रकम। घर में दो लोग कमाते हैं तो दोनों की इन-हैंड आय जोड़ें। फिर बँटवारा चुनें। मुंबई, बेंगलुरु या दिल्ली जैसे महँगे शहरों में अकेले किराए में ही आधी सैलरी चली जाती है, वहाँ 60/20/20 ज़्यादा व्यावहारिक है।
उदाहरण
₹50,000 इन-हैंड सैलरी पर 50/30/20 नियम: ज़रूरतों के लिए ₹25,000, इच्छाओं के लिए ₹15,000 और बचत के लिए ₹10,000। साल भर में यह बचत ₹1.2 लाख होती है, ब्याज या रिटर्न अलग से।
| इन-हैंड सैलरी | ज़रूरतें (50%) | इच्छाएँ (30%) | बचत (20%) | साल भर की बचत |
|---|---|---|---|---|
| ₹25,000 | ₹12,500 | ₹7,500 | ₹5,000 | ₹60,000 |
| ₹40,000 | ₹20,000 | ₹12,000 | ₹8,000 | ₹96,000 |
| ₹60,000 | ₹30,000 | ₹18,000 | ₹12,000 | ₹1.44 लाख |
| ₹1,00,000 | ₹50,000 | ₹30,000 | ₹20,000 | ₹2.4 लाख |
इमरजेंसी फ़ंड
बचत का पहला लक्ष्य इमरजेंसी फ़ंड होना चाहिए: कम से कम 3 से 6 महीने की ज़रूरतों के बराबर रकम, जिसे ज़रूरत पड़ने पर तुरंत निकाला जा सके – बचत खाता, स्वीप-इन FD या लिक्विड फ़ंड। नौकरी जाने, बीमारी या अचानक मरम्मत के समय यही आपको क़र्ज़ से बचाता है। अगर घर में कमाने वाला एक ही है, तो 6 महीने या उससे ज़्यादा रखें।
बजट को टिकाऊ बनाने के तरीक़े
- पहले बचत, फिर ख़र्च: सैलरी आते ही SIP या RD का ऑटो-डेबिट हो जाए, ताकि बचत “जो बचा” पर न टिके।
- UPI ख़र्च पर नज़र: छोटे-छोटे UPI भुगतान महीने के अंत में बड़ी रकम बन जाते हैं; हर महीने बैंक स्टेटमेंट देखें।
- त्योहार और सालाना ख़र्च: दिवाली, शादियाँ, स्कूल की सालाना फ़ीस और बीमा प्रीमियम के लिए हर महीने थोड़ा अलग रखें।
- महँगा क़र्ज़ पहले: क्रेडिट कार्ड पर बकाया हो तो बचत का बड़ा हिस्सा पहले उसे चुकाने में लगाएँ – क्रेडिट कार्ड बकाया कैलकुलेटर देखें।
किसी ख़ास लक्ष्य के लिए हर महीने कितना चाहिए, यह बचत लक्ष्य कैलकुलेटर बताएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या 50/30/20 नियम भारत में काम करता है?
शुरुआत के लिए हाँ। बड़े शहरों में किराया ज़्यादा होने से ज़रूरतें 50% से ऊपर जा सकती हैं – तब 60/20/20 चुनें। मक़सद यह है कि बचत कम से कम 10–20% बनी रहे।
EMI ज़रूरत में गिनें या बचत में?
लोन की नियमित EMI ज़रूरतों में आती है। तय EMI से ऊपर किया गया प्रीपेमेंट बचत और क़र्ज़ चुकाने वाले 20% में गिना जाता है।
बीमा प्रीमियम कहाँ जोड़ें?
हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस ज़रूरतों में आते हैं। निवेश वाली पॉलिसी (जैसे एंडोमेंट) का प्रीमियम बचत में गिना जा सकता है।
सैलरी बढ़ने पर क्या करें?
बढ़ी हुई सैलरी का बड़ा हिस्सा सीधे बचत में डालें, ताकि ख़र्च उतनी तेज़ी से न बढ़ें। SIP में सालाना स्टेप-अप इसका आसान तरीक़ा है।
आख़िरी अपडेट: 8 अक्टूबर 2026