लोन EMI कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें
- लोन राशि – जितना पैसा आप उधार ले रहे हैं। अगर प्रोसेसिंग फ़ीस लोन में से ही काटी जाएगी, तब भी EMI पूरी सैंक्शन राशि पर बनती है।
- ब्याज दर – बैंक या NBFC की बताई सालाना दर।
- अवधि – साल या महीनों में। पर्सनल लोन आम तौर पर 1 से 5 साल के होते हैं।
36 महीने तक की अवधि में आपको हर महीने की किस्त का शेड्यूल दिखेगा, उससे लंबी अवधि में साल-दर-साल का।
EMI कैसे निकलती है
बैंक रिड्यूसिंग बैलेंस तरीक़े से EMI तय करते हैं:
EMI = P × r ÷ (1 − (1 + r)−n)
P लोन राशि, r मासिक ब्याज दर (सालाना दर ÷ 12) और n किस्तों की संख्या। हर किस्त में से पहले उस महीने का ब्याज कटता है, बाक़ी रकम मूलधन घटाती है। इसलिए किस्त एक जैसी रहती है, पर उसमें ब्याज का हिस्सा हर महीने घटता जाता है।
उदाहरण: ₹5 लाख का पर्सनल लोन
मान लीजिए आप 12% सालाना ब्याज पर ₹5 लाख का लोन 5 साल के लिए लेते हैं। EMI ₹11,122 होगी और 60 किस्तों में आप कुल ₹1,67,333 ब्याज देंगे। अलग-अलग अवधि का असर देखिए:
| अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 1 साल | ₹44,424 | ₹33,093 |
| 2 साल | ₹23,537 | ₹64,882 |
| 3 साल | ₹16,607 | ₹97,858 |
| 4 साल | ₹13,167 | ₹1,32,012 |
| 5 साल | ₹11,122 | ₹1,67,333 |
अवधि दोगुनी करने पर EMI आधी नहीं होती, लेकिन ब्याज लगभग दोगुना हो जाता है। इसलिए उतनी ही अवधि चुनें जितनी EMI आप आराम से भर सकें।
फ़्लैट रेट से सावधान
कुछ दुकानदार, डीलर या लोन एजेंट “फ़्लैट रेट” बताते हैं – यानी पूरी अवधि का ब्याज शुरुआती रकम पर। 3 साल के लिए 10% फ़्लैट रेट सुनने में सस्ता लगता है, पर रिड्यूसिंग बैलेंस में यह लगभग 18% के बराबर पड़ता है, क्योंकि आप चुकाए जा चुके पैसे पर भी ब्याज देते रहते हैं। तुलना हमेशा रिड्यूसिंग रेट या APR पर करें। RBI के नियमों के तहत लोन देने वाली संस्था को लोन से पहले की-फ़ैक्ट स्टेटमेंट (KFS) देनी होती है, जिसमें सालाना असल दर (APR) और सारे शुल्क लिखे होते हैं।
लोन सस्ता करने के तरीक़े
- क्रेडिट स्कोर अच्छा रखें – 750 से ऊपर के CIBIL स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर मिलती है।
- कई बैंकों की तुलना करें, जिसमें आपकी सैलरी वाला बैंक भी हो – वह अक्सर प्री-अप्रूव्ड ऑफ़र देता है।
- प्रोसेसिंग फ़ीस और प्रीपेमेंट चार्ज पहले से पूछें। फ़िक्स्ड रेट पर्सनल लोन में समय से पहले लोन बंद करने पर चार्ज लग सकता है।
- महँगे क़र्ज़ पहले चुकाएँ – एक से ज़्यादा लोन हों तो क़र्ज़ चुकाने की योजना वाला कैलकुलेटर देखें।
ध्यान दें: ये नतीजे योजना बनाने के लिए अनुमान हैं, वित्तीय या टैक्स सलाह नहीं। अंतिम आँकड़े बैंक के सैंक्शन लेटर और लोन एग्रीमेंट में होते हैं; बड़े फ़ैसले से पहले किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या SEBI में पंजीकृत सलाहकार से बात करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
₹1 लाख के पर्सनल लोन की EMI कितनी होगी?
12% ब्याज पर ₹1 लाख की EMI 1 साल के लिए लगभग ₹8,885, 3 साल के लिए ₹3,321 और 5 साल के लिए ₹2,224 होती है। अपनी दर और अवधि ऊपर डालकर सटीक आँकड़ा देखें।
ब्याज दर और APR में क्या फ़र्क़ है?
ब्याज दर से आपकी EMI तय होती है। APR में प्रोसेसिंग फ़ीस जैसे ज़रूरी शुल्क भी जुड़ते हैं, इसलिए वह आम तौर पर थोड़ा ज़्यादा होता है। अलग-अलग ऑफ़र की तुलना APR पर करना बेहतर है।
क्या लोन जल्दी चुकाने से ब्याज बचता है?
हाँ। रिड्यूसिंग बैलेंस में ब्याज सिर्फ़ बची रकम पर लगता है, इसलिए प्रीपेमेंट से आगे का ब्याज घट जाता है। फ़िक्स्ड रेट पर्सनल लोन पर बैंक फ़ोरक्लोज़र चार्ज ले सकता है – एग्रीमेंट में देख लें।
क्या यह कैलकुलेटर एजुकेशन लोन के लिए भी चलेगा?
EMI का फ़ॉर्मूला वही है। बस ध्यान रखें कि एजुकेशन लोन में पढ़ाई के दौरान (मोरेटोरियम) ब्याज जुड़ता रहता है, इसलिए EMI शुरू होने के समय की बकाया रकम को लोन राशि के रूप में डालें।
आख़िरी अपडेट: 8 अक्टूबर 2026