बैंक होम लोन की रकम कैसे तय करते हैं
भारतीय बैंक और हाउसिंग फ़ाइनेंस कंपनियाँ मुख्य रूप से दो चीज़ें देखती हैं:
- FOIR (Fixed Obligation to Income Ratio) – नई होम लोन EMI समेत आपकी सारी EMI मिलाकर मासिक नेट आय का कितना हिस्सा बनती हैं। आम तौर पर बैंक इसे 50–60% तक रखते हैं; ऊँची आय पर कुछ बैंक ज़्यादा भी मान लेते हैं।
- LTV (Loan to Value) – RBI के नियमों के तहत ₹30 लाख तक के लोन पर घर की क़ीमत का अधिकतम 90%, ₹30–75 लाख पर 80% और ₹75 लाख से ऊपर 75% फ़ाइनेंस हो सकता है।
इसके अलावा उम्र (लोन आम तौर पर 60–70 साल की उम्र तक ख़त्म होना चाहिए), CIBIL स्कोर, नौकरी की स्थिरता और संपत्ति के कागज़ भी देखे जाते हैं।
कैलकुलेटर कैसे हिसाब करता है
पहले मासिक बजट: B = कम वाली रकम (आय × होम लोन सीमा, आय × FOIR − मौजूदा EMI)। फिर उस बजट से होम लोन EMI, बीमा और (अगर डाला हो) प्रॉपर्टी टैक्स चुकाने लायक़ लोन निकाला जाता है:
क़ीमत = (B − बीमा ÷ 12 + f × डाउन पेमेंट) ÷ (f + t)
जहाँ f हर ₹1 के लोन पर मासिक EMI है और t प्रॉपर्टी टैक्स की दर ÷ 12। पहले से भरी दोनों सीमाएँ 50% हैं; अपने बैंक के नियम के हिसाब से बदलें।
उदाहरण
सालाना ₹12 लाख इन-हैंड आय (₹1 लाख महीना), कोई दूसरी EMI नहीं, ₹10 लाख डाउन पेमेंट के लिए, 8.5% ब्याज, 20 साल, ₹3,000 सालाना बीमा। 50% FOIR पर अधिकतम मासिक बजट ₹50,000 बनता है। इससे लगभग ₹57.33 लाख का लोन और ₹67.33 लाख तक का घर संभव है।
अगर ₹10,000 की कार लोन EMI पहले से चल रही हो, तो बजट ₹40,000 रह जाता है और लोन घटकर लगभग ₹45.8 लाख हो जाता है। यानी हर ₹10,000 की मौजूदा EMI लोन एलिजिबिलिटी को लगभग ₹11.52 लाख घटा देती है।
पर LTV नियम भी देखें: इस क़ीमत पर ₹10 लाख का डाउन पेमेंट क़ीमत का सिर्फ़ 14.85% है, जबकि ₹30–75 लाख के लोन पर बैंक क़ीमत का 80% तक ही देते हैं। ₹10 लाख डाउन पेमेंट के साथ असल सीमा लगभग ₹50 लाख का घर (₹40 लाख लोन) होगी – आय के हिसाब से बड़ा लोन मिलना संभव हो, तब भी बड़ा घर लेने के लिए डाउन पेमेंट बढ़ाना होगा।
आय के हिसाब से अनुमान (50% FOIR, 8.5%, 20 साल, ₹10 लाख डाउन पेमेंट)
| सालाना नेट आय | अधिकतम मासिक बजट | लोन राशि | घर की क़ीमत |
|---|---|---|---|
| ₹6 लाख | ₹25,000 | ₹28.52 लाख | ₹38.52 लाख |
| ₹9 लाख | ₹37,500 | ₹42.92 लाख | ₹52.92 लाख |
| ₹12 लाख | ₹50,000 | ₹57.33 लाख | ₹67.33 लाख |
| ₹18 लाख | ₹75,000 | ₹86.14 लाख | ₹96.14 लाख |
| ₹24 लाख | ₹1,00,000 | ₹1.15 करोड़ | ₹1.25 करोड़ |
तालिका सिर्फ़ आय के हिसाब से है। ऊपर वाली पंक्तियों में घर की क़ीमत के मुक़ाबले डाउन पेमेंट कम होने से LTV नियम लोन को और सीमित कर सकते हैं।
एलिजिबिलिटी बढ़ाने के तरीक़े
- सह-आवेदक जोड़ें – पति/पत्नी या माता-पिता की आय जुड़ने से एलिजिबिलिटी बढ़ती है। महिला सह-मालिक होने पर कई बैंक थोड़ी कम दर भी देते हैं।
- छोटे लोन बंद करें – कार या पर्सनल लोन की कुछ महीने बची EMI चुका देने से FOIR में जगह बनती है।
- लंबी अवधि – 20 की जगह 25–30 साल चुनने से उतनी ही EMI में बड़ा लोन मिलता है, पर कुल ब्याज बहुत बढ़ जाता है।
- क्रेडिट स्कोर सुधारें – अच्छे स्कोर पर कम दर मिलती है, और कम दर पर उसी EMI में ज़्यादा लोन।
सबसे बड़ा लोन लेना ज़रूरी नहीं कि सही हो। बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट की बचत और घर की मरम्मत के लिए भी जगह छोड़ें। तय घर की EMI होम लोन EMI कैलकुलेटर में देखें।
ध्यान दें: ये नतीजे योजना बनाने के लिए अनुमान हैं, वित्तीय या टैक्स सलाह नहीं। अंतिम आँकड़े बैंक के सैंक्शन लेटर और लोन एग्रीमेंट में होते हैं; बड़े फ़ैसले से पहले किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या SEBI में पंजीकृत सलाहकार से बात करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
₹50,000 सैलरी पर कितना होम लोन मिलेगा?
50% FOIR, 8.5% ब्याज और 20 साल पर अधिकतम EMI ₹25,000 बनती है, जिससे लगभग ₹28.81 लाख का लोन मिल सकता है – बशर्ते कोई दूसरी EMI न हो। असली रकम बैंक, उम्र और क्रेडिट स्कोर पर निर्भर है।
FOIR क्या होता है?
Fixed Obligation to Income Ratio – सारी मासिक EMI (नई होम लोन EMI समेत) ÷ मासिक नेट आय। बैंक इसे एक सीमा, अक्सर 50–60%, के भीतर रखते हैं ताकि आपके पास घर चलाने का पैसा बचा रहे।
क्या ग्रॉस सैलरी डालें या नेट?
ज़्यादातर बैंक FOIR नेट (इन-हैंड) मासिक आय पर देखते हैं, इसलिए यहाँ नेट आय डालें। कुछ बैंक ग्रॉस आय पर अलग प्रतिशत लगाते हैं – अपने बैंक से पूछ लें।
डाउन पेमेंट के अलावा कितना पैसा चाहिए?
स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन (राज्य के हिसाब से आम तौर पर 5–8%), प्रोसेसिंग फ़ीस, लीगल चार्ज और शिफ़्टिंग-इंटीरियर का ख़र्च। ये ज़्यादातर लोन में शामिल नहीं होते।
आख़िरी अपडेट: 8 अक्टूबर 2026