अमॉर्टाइज़ेशन शेड्यूल क्या है?
EMI वाले लोन में हर महीने एक जैसी किस्त जाती है। उसमें से पहले उस महीने का ब्याज चुकता होता है और बाक़ी रकम मूलधन घटाती है। ब्याज सिर्फ़ बची रकम पर लगता है, इसलिए हर किस्त के साथ यह बँटवारा बदलता है: शुरुआत में किस्त का बड़ा हिस्सा ब्याज होता है, आख़िर में लगभग सारा मूलधन। अमॉर्टाइज़ेशन शेड्यूल यही बदलाव साल-दर-साल दिखाता है – हर साल कितना ब्याज गया, कितना मूलधन चुका और कितनी रकम बाक़ी है। होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन, तीनों इसी तरह चलते हैं।
कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें
- लोन राशि – नया लोन हो तो पूरी राशि, चल रहा लोन हो तो आज की बकाया रकम (बैंक स्टेटमेंट में “principal outstanding”)।
- ब्याज दर – अभी लागू सालाना दर।
- अवधि – बचे हुए साल।
- अतिरिक्त भुगतान – वैकल्पिक। हर महीने EMI के ऊपर जितना ज़्यादा जमा कर सकें, वह डालें।
उदाहरण: ₹30 लाख का होम लोन
8.5% पर 20 साल के ₹30 लाख के लोन की EMI ₹26,035 है। पहली तीन किस्तें ऐसे बँटती हैं:
| किस्त | ब्याज | मूलधन | बाकी रकम |
|---|---|---|---|
| 1 | ₹21,250.00 | ₹4,784.70 | ₹29,95,215 |
| 2 | ₹21,216.11 | ₹4,818.59 | ₹29,90,397 |
| 3 | ₹21,181.98 | ₹4,852.72 | ₹29,85,544 |
पहली किस्त का लगभग 82% हिस्सा ब्याज है। किस्त नंबर 143 (यानी 12वें साल) से पहले मूलधन का हिस्सा ब्याज से बड़ा नहीं होता। पूरे लोन पर कुल ब्याज लगभग ₹32.48 लाख बनता है।
हर महीने थोड़ा ज़्यादा चुकाने का असर
EMI के ऊपर दी गई हर रकम सीधे मूलधन घटाती है, और उस पर आगे कभी ब्याज नहीं लगता। उसी ₹30 लाख के लोन पर:
| अतिरिक्त भुगतान / महीना | लोन ख़त्म होने में | कुल ब्याज | बचत |
|---|---|---|---|
| कुछ नहीं | 20 साल | ₹32.48 लाख | — |
| ₹2,000 | 16 साल, 10 महीने | ₹26.35 लाख | ₹6.13 लाख |
| ₹5,000 | 13 साल, 8 महीने | ₹20.75 लाख | ₹11.73 लाख |
| ₹10,000 | 10 साल, 7 महीने | ₹15.48 लाख | ₹17 लाख |
सिर्फ़ ₹5,000 महीने का अतिरिक्त भुगतान लोन को कई साल छोटा कर देता है। सालाना बोनस से एकमुश्त पार्ट-पेमेंट का असर भी ऐसा ही होता है – जितनी जल्दी करें, उतनी ज़्यादा बचत।
प्रीपेमेंट से पहले ये बातें देखें
- चार्ज: RBI के नियमों के तहत व्यक्तिगत उधारकर्ताओं के फ़्लोटिंग रेट लोन पर प्रीपेमेंट चार्ज नहीं लगता। फ़िक्स्ड रेट लोन में शर्तें एग्रीमेंट में देखें।
- EMI घटाएँ या अवधि? पार्ट-पेमेंट के बाद बैंक आपसे पूछ सकता है। EMI वही रखकर अवधि घटाने से सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
- इमरजेंसी फ़ंड पहले: पूरा पैसा लोन में डालने से पहले कुछ महीनों का ख़र्च अलग रखें।
- टैक्स का हिसाब: पुरानी टैक्स व्यवस्था में होम लोन के ब्याज पर छूट मिलती है, इसलिए वहाँ प्रीपेमेंट का फ़ायदा थोड़ा कम हो सकता है।
ध्यान दें: ये नतीजे योजना बनाने के लिए अनुमान हैं, वित्तीय या टैक्स सलाह नहीं। अंतिम आँकड़े बैंक के सैंक्शन लेटर और लोन एग्रीमेंट में होते हैं; बड़े फ़ैसले से पहले किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या SEBI में पंजीकृत सलाहकार से बात करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शुरुआत में EMI का ज़्यादातर हिस्सा ब्याज क्यों होता है?
क्योंकि ब्याज हर महीने बकाया रकम पर लगता है और शुरुआत में बकाया सबसे ज़्यादा होता है। जैसे-जैसे मूलधन घटता है, ब्याज का हिस्सा कम और मूलधन का हिस्सा बड़ा होता जाता है।
क्या पार्ट-पेमेंट से EMI कम होगी या अवधि?
यह बैंक और आपकी पसंद पर निर्भर है। यह कैलकुलेटर EMI वही रखकर अवधि घटाने वाला तरीक़ा दिखाता है, जिससे सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है।
क्या चल रहे लोन के लिए भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं?
हाँ। लोन राशि में आज की बकाया रकम, ब्याज दर में आज की दर और अवधि में बचे हुए साल डालें। नतीजा बैंक के शेड्यूल के बहुत क़रीब होगा।
बैंक का शेड्यूल इससे थोड़ा अलग क्यों है?
बैंक दिनों के हिसाब से ब्याज, किस्त की तारीख़ और राउंडिंग अलग तरह से कर सकते हैं, और फ़्लोटिंग रेट बदलने पर पूरा शेड्यूल बदल जाता है। फ़र्क़ आम तौर पर बहुत छोटा होता है।
आख़िरी अपडेट: 8 अक्टूबर 2026