CII क्या है?
कॉस्ट इन्फ़्लेशन इंडेक्स (CII) केंद्र सरकार हर वित्त वर्ष के लिए आयकर विभाग के ज़रिए अधिसूचित करती है। इसका मक़सद है लंबे समय तक रखी संपत्ति – ज़मीन, मकान, सोना, कुछ बॉन्ड – की ख़रीद लागत को महँगाई के हिसाब से बढ़ाना, ताकि कैपिटल गेन टैक्स सिर्फ़ असली मुनाफ़े पर लगे, महँगाई वाले “काग़ज़ी” मुनाफ़े पर नहीं। इसे इंडेक्सेशन कहते हैं। मौजूदा तालिका का आधार वर्ष 2001-02 (= 100) है और आख़िरी अधिसूचित मान वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 376 है।
फ़ॉर्मूला
इंडेक्स्ड लागत = ख़रीद लागत × बिक्री वर्ष का CII ÷ ख़रीद वर्ष का CII
उदाहरण: वित्त वर्ष 2010-11 (CII 167) में ₹10 लाख में ख़रीदा प्लॉट वित्त वर्ष 2025-26 (CII 376) में बेचा गया। इंडेक्स्ड लागत = 10,00,000 × 376 ÷ 167 = ₹22,51,497। अगर बिक्री ₹40 लाख में हुई, तो इंडेक्सेशन के बाद लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन लगभग ₹17.49 लाख बनता है, जबकि बिना इंडेक्सेशन ₹30 लाख।
सुधार (जैसे नया कमरा बनवाना) पर हुए ख़र्च को उसी साल के CII से अलग इंडेक्स किया जाता है – हर ख़र्च के लिए कैलकुलेटर अलग से चलाएँ और जोड़ लें। 1 अप्रैल 2001 से पहले ख़रीदी संपत्ति के लिए 1 अप्रैल 2001 की उचित बाज़ार क़ीमत (या ख़रीद लागत, जो भी नियमों के तहत लागू हो) को ख़रीद लागत मानकर वर्ष 2001 डालें।
CII तालिका पर एक नज़र
₹1 लाख की लागत वित्त वर्ष 2025-26 के CII पर कितनी बनती है:
| ख़रीद का वित्त वर्ष | CII | 2025-26 में इंडेक्स्ड लागत | CII की औसत सालाना बढ़त |
|---|---|---|---|
| 2001-02 | 100 | ₹3,76,000 | 5.67% |
| 2005-06 | 117 | ₹3,21,368 | 6.01% |
| 2010-11 | 167 | ₹2,25,150 | 5.56% |
| 2015-16 | 254 | ₹1,48,031 | 4% |
| 2020-21 | 301 | ₹1,24,917 | 4.55% |
| 2023-24 | 348 | ₹1,08,046 | 3.95% |
| 2024-25 | 363 | ₹1,03,581 | 3.58% |
| 2025-26 | 376 | ₹1,00,000 | 0% |
इंडेक्सेशन अब कहाँ लागू होता है
23 जुलाई 2024 से कैपिटल गेन टैक्स के नियम बदले: ज़्यादातर संपत्तियों पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन अब 12.5% की दर से बिना इंडेक्सेशन लगता है। ज़मीन या मकान, जो किसी व्यक्ति या HUF ने 23 जुलाई 2024 से पहले ख़रीदा हो, उसके लिए 20% दर इंडेक्सेशन के साथ और 12.5% बिना इंडेक्सेशन – दोनों में से कम टैक्स वाला विकल्प रखा गया। 1 अप्रैल 2023 के बाद ख़रीदे गए डेट म्यूचुअल फ़ंड पर इंडेक्सेशन नहीं मिलता। 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू है, जिसमें धाराओं के नंबर बदले हैं। नियम पेचीदा हैं, इसलिए रिटर्न भरने से पहले किसी CA से अपनी स्थिति पक्की करें।
CII और असली महँगाई
CII उपभोक्ता महँगाई का सीधा पैमाना नहीं है। क़ानून के अनुसार इसे शहरी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की पिछले साल की औसत बढ़त के 75% को ध्यान में रखकर तय किया जाता है, इसलिए यह आम तौर पर रोज़ की चीज़ों की असली महँगाई से धीमा बढ़ता है। रोज़मर्रा की क़ीमतों पर महँगाई का असर देखने के लिए आधिकारिक CPI आँकड़े सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) जारी करता है। भविष्य की बचत पर महँगाई का असर देखने के लिए रिटायरमेंट कैलकुलेटर में महँगाई की दर डालें।
ध्यान दें: ये नतीजे योजना बनाने के लिए अनुमान हैं, वित्तीय या टैक्स सलाह नहीं। अंतिम आँकड़े बैंक के सैंक्शन लेटर और लोन एग्रीमेंट में होते हैं; बड़े फ़ैसले से पहले किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या SEBI में पंजीकृत सलाहकार से बात करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
वित्त वर्ष 2025-26 का CII कितना है?
376। पिछले वर्षों के मान: 2024-25 में 363, 2023-24 में 348 और 2022-23 में 331। आधार वर्ष 2001-02 का CII 100 है।
इंडेक्स्ड लागत कैसे निकालें?
ख़रीद लागत × बिक्री वर्ष का CII ÷ ख़रीद वर्ष का CII। वित्त वर्ष 2012-13 (CII 200) की ₹5 लाख की लागत, 2024-25 (CII 363) में ₹9,07,500 बनती है।
2001 से पहले ख़रीदी संपत्ति का क्या?
ऐसी संपत्ति के लिए 1 अप्रैल 2001 की उचित बाज़ार क़ीमत को लागत माना जा सकता है (कुछ सीमाओं के साथ), और ख़रीद वर्ष 2001-02 (CII 100) लिया जाता है।
क्या शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड पर इंडेक्सेशन मिलता है?
नहीं। सूचीबद्ध शेयरों और इक्विटी फ़ंड पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन एक तय छूट सीमा के ऊपर बिना इंडेक्सेशन के टैक्स होता है।
आख़िरी अपडेट: 8 अक्टूबर 2026