दो तरीक़े, एक लक्ष्य
दोनों तरीक़ों में आप हर क़र्ज़ की EMI या न्यूनतम भुगतान समय पर भरते रहते हैं, और ऊपर की सारी अतिरिक्त रकम एक “लक्ष्य” क़र्ज़ पर लगाते हैं। जब वह ख़त्म हो जाता है, तो उसकी EMI भी अगले लक्ष्य में जुड़ जाती है – इसलिए हर बार चुकाने की रफ़्तार बढ़ती है। फ़र्क़ सिर्फ़ लक्ष्य चुनने के क्रम में है:
- स्नोबॉल (बर्फ़ का गोला): सबसे छोटा बकाया पहले। जल्दी-जल्दी एक-एक क़र्ज़ ख़त्म होते दिखते हैं, जिससे हिम्मत बनी रहती है।
- एवलांच (हिमस्खलन): सबसे ऊँची ब्याज दर पहले। गणित के हिसाब से इसमें सबसे कम ब्याज लगता है।
उदाहरण: एक आम भारतीय परिवार का क़र्ज़
पहले से भरे आँकड़े ऐसी स्थिति दिखाते हैं: क्रेडिट कार्ड पर ₹60,000 (42% सालाना), ₹2 लाख का पर्सनल लोन (14%), ₹4.5 लाख का कार लोन (10.5%) और ₹30,000 की नो-कॉस्ट EMI (0%)। कुल मासिक EMI ₹23,500, ऊपर से ₹5,000 अतिरिक्त।
- स्नोबॉल: क़र्ज़ मुक्ति 2 साल, 7 महीने में, कुल ब्याज ₹1,22,559।
- एवलांच: क़र्ज़ मुक्ति 2 साल, 7 महीने में, कुल ब्याज ₹1,20,285।
यहाँ एवलांच लगभग ₹2,275 बचाता है, क्योंकि वह सबसे पहले 42% वाले कार्ड को निशाना बनाता है। स्नोबॉल पहले ₹30,000 की नो-कॉस्ट EMI निपटाता है, जिस पर कोई ब्याज था ही नहीं – मन को अच्छा लगता है, पर महँगा कार्ड कुछ महीने और चलता रहता है।
कौन-सा तरीक़ा चुनें?
अगर आप योजना पर टिके रह सकते हैं, तो एवलांच सबसे सस्ता है। अगर पहले भी क़र्ज़ चुकाने की योजनाएँ बीच में छूटी हैं, तो स्नोबॉल की जल्दी मिलने वाली छोटी जीतें मदद कर सकती हैं। जब सबसे छोटा क़र्ज़ ही सबसे महँगा हो – जैसे कार्ड का छोटा बकाया – तो दोनों तरीक़े एक ही क्रम देते हैं।
भारत में क़र्ज़ घटाने के व्यावहारिक क़दम
- क्रेडिट कार्ड को पहले निपटाएँ: 36–45% सालाना ब्याज किसी भी निवेश के रिटर्न से ज़्यादा है।
- महँगे क़र्ज़ को सस्ते से बदलें: कार्ड बकाया को EMI में, या पर्सनल लोन को कम दर वाले लोन से बदलना अक्सर फ़ायदेमंद होता है; प्रोसेसिंग फ़ीस और फ़ोरक्लोज़र चार्ज जोड़कर तुलना करें।
- ऐप लोन से सावधान: केवल RBI-विनियमित बैंक या NBFC से जुड़े ऐप से ही लोन लें, और शुल्क की पूरी जानकारी (KFS) देखें।
- फ़्लोटिंग रेट होम लोन पर प्रीपेमेंट चार्ज नहीं लगता, लेकिन उसकी दर आम तौर पर सबसे कम होती है – इसलिए उसे सबसे आख़िर में रखें।
किसी एक कार्ड का अलग हिसाब क्रेडिट कार्ड बकाया कैलकुलेटर से देखें।
ध्यान दें: ये नतीजे योजना बनाने के लिए अनुमान हैं, वित्तीय या टैक्स सलाह नहीं। अंतिम आँकड़े बैंक के सैंक्शन लेटर और लोन एग्रीमेंट में होते हैं; बड़े फ़ैसले से पहले किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या SEBI में पंजीकृत सलाहकार से बात करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
स्नोबॉल और एवलांच में क्या फ़र्क़ है?
स्नोबॉल में सबसे छोटा बकाया पहले चुकाते हैं, एवलांच में सबसे ऊँची ब्याज दर वाला। दोनों में हर महीने कुल भुगतान बराबर रहता है; एवलांच में आम तौर पर कम ब्याज लगता है।
नो-कॉस्ट EMI को कैसे भरें?
ब्याज दर 0 और EMI उसकी मासिक किस्त डालें। ध्यान रखें कि नो-कॉस्ट EMI में भी प्रोसेसिंग फ़ीस या ब्याज पर GST लग सकता है।
अतिरिक्त भुगतान कितना रखें?
जितना आप हर महीने बिना नया क़र्ज़ लिए दे सकें। बजट कैलकुलेटर से देखें कि बचत वाले हिस्से में से कितना क़र्ज़ पर लगाया जा सकता है – पर एक छोटा इमरजेंसी फ़ंड पहले बना लें।
क्या होम लोन भी इसमें डालना चाहिए?
डाल सकते हैं, पर होम लोन की दर सबसे कम होती है, इसलिए एवलांच में वह आख़िर में आएगा। कई लोग पहले बाक़ी सब क़र्ज़ ख़त्म करके फिर होम लोन पर प्रीपेमेंट करते हैं।
आख़िरी अपडेट: 8 अक्टूबर 2026