बकरीद 2027 कब है?
उम्म अल-क़ुरा कैलेंडर के अनुसार ईद-उल-अज़हा रविवार, 16 मई 2027 को है, यानी 1448 हिजरी की 10 ज़िलहिज्जा। भारत में तारीख़ ज़िलहिज्जा महीने का चाँद दिखने पर तय होती है: चाँद जिस शाम दिखे, उससे दसवें दिन बकरीद होती है। भारत में ज़िलहिज्जा का चाँद अक्सर सऊदी अरब से एक शाम बाद दिखता है, इसलिए यहाँ बकरीद आम तौर पर एक दिन बाद मनाई जाती है। केंद्र सरकार की छुट्टियों की सूची में यह "ईद-उल-ज़ुहा (बकरीद)" नाम से राजपत्रित छुट्टी है।
आने वाले वर्षों में बकरीद
| हिजरी वर्ष | बकरीद | वार | अरफ़ा का दिन |
|---|---|---|---|
| 1448 | 16 मई 2027 | रविवार | 15 मई |
| 1449 | 5 मई 2028 | शुक्रवार | 4 मई |
| 1450 | 24 अप्रैल 2029 | मंगलवार | 23 अप्रैल |
| 1451 | 13 अप्रैल 2030 | शनिवार | 12 अप्रैल |
| 1452 | 2 अप्रैल 2031 | बुधवार | 1 अप्रैल |
| 1453 | 22 मार्च 2032 | सोमवार | 21 मार्च |
| 1454 | 11 मार्च 2033 | शुक्रवार | 10 मार्च |
| 1455 | 1 मार्च 2034 | बुधवार | 28 फ़रवरी |
अरफ़ा का दिन (9 ज़िलहिज्जा) बकरीद से एक दिन पहले होता है, जब हाजी मक्का के पास अरफ़ात के मैदान में इकट्ठा होते हैं; जो हज पर नहीं हैं, उनमें से बहुत-से लोग इस दिन रोज़ा रखते हैं। इस्लामी साल लगभग 11 दिन छोटा होने के कारण बकरीद हर साल क़रीब 11 दिन पहले आती है।
बकरीद का महत्व
ईद-उल-अज़हा, यानी "क़ुर्बानी की ईद", पैग़ंबर इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की उस आज़माइश की याद में मनाई जाती है जिसमें वे अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे इस्माईल की क़ुर्बानी देने को तैयार हो गए थे, और अल्लाह ने उनकी जगह एक मेढ़ा भेज दिया। यह त्योहार हज के दिनों में आता है, जो इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है।
दिन की शुरुआत ईद की नमाज़ से होती है। इसके बाद जो लोग सक्षम हैं, वे बकरा, भेड़ या अन्य जायज़ जानवर की क़ुर्बानी करते हैं। परंपरा के अनुसार गोश्त तीन हिस्सों में बाँटा जाता है: एक हिस्सा अपने परिवार के लिए, एक रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए, और एक ज़रूरतमंदों के लिए। क़ुर्बानी ईद के दिन से लेकर 12 ज़िलहिज्जा तक की जा सकती है।
भारत में तैयारी
- जानवरों की ख़रीद: शहरों में बकरीद से एक-दो सप्ताह पहले बकरा मंडियाँ लगती हैं। दाम आख़िरी दिनों में अक्सर बढ़ जाते हैं, इसलिए काउंटडाउन देखकर पहले से योजना बनाएँ।
- स्थानीय नियम: कई नगर निगम क़ुर्बानी के लिए तय स्थान, सफ़ाई और कचरा निपटान के नियम जारी करते हैं। उनका पालन करें ताकि पड़ोसियों को परेशानी न हो।
- ऑनलाइन क़ुर्बानी: कई संस्थाएँ आपकी ओर से क़ुर्बानी करवाकर गोश्त ज़रूरतमंदों में बाँटती हैं; भरोसेमंद संस्था ही चुनें और रसीद लें।
इससे पहले आने वाले त्योहारों के लिए रमज़ान और ईद-उल-फ़ित्र के काउंटडाउन देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बकरीद 2027 कब है?
उम्म अल-क़ुरा कैलेंडर के अनुसार बकरीद रविवार, 16 मई 2027 को है। भारत में ज़िलहिज्जा का चाँद दिखने के अनुसार यह एक दिन बाद भी हो सकती है।
बकरीद और ईद-उल-अज़हा एक ही हैं?
हाँ। ईद-उल-अज़हा को भारत में बकरीद या बक़रीद कहा जाता है, और सरकारी सूची में इसे ईद-उल-ज़ुहा लिखा जाता है। तीनों नाम एक ही त्योहार के हैं।
बकरीद ईद-उल-फ़ित्र के कितने दिन बाद आती है?
लगभग 70 दिन बाद। ईद-उल-फ़ित्र 1 शव्वाल को होती है और बकरीद 10 ज़िलहिज्जा को, यानी दो महीने और दस दिन बाद।
क़ुर्बानी कब तक की जा सकती है?
क़ुर्बानी ईद की नमाज़ के बाद से 12 ज़िलहिज्जा के सूर्यास्त तक की जा सकती है, यानी ईद समेत तीन दिन।
आख़िरी अपडेट: 8 अक्टूबर 2026