रमज़ान 2027 कब शुरू होगा?
उम्म अल-क़ुरा कैलेंडर के अनुसार रमज़ान 1448 हिजरी सोमवार, 8 फ़रवरी 2027 से शुरू होगा। पहली तरावीह इससे पहले की शाम, 7 फ़रवरी को होगी। भारत में रमज़ान की शुरुआत 29 शाबान की शाम चाँद देखने से तय होती है: चाँद दिख जाए तो अगले दिन पहला रोज़ा होता है, न दिखे तो शाबान के 30 दिन पूरे किए जाते हैं। इसलिए भारत में पहला रोज़ा अक्सर सऊदी अरब से एक दिन बाद होता है। सही तारीख़ के लिए अपने शहर की हिलाल (रुयत-ए-हिलाल) कमेटी या मस्जिद की घोषणा देखें।
आने वाले वर्षों में रमज़ान
| हिजरी वर्ष | रमज़ान शुरू | पहली तरावीह (शाम) | ईद-उल-फ़ित्र | रोज़ों के दिन |
|---|---|---|---|---|
| 1448 | 8 फ़रवरी 2027 | 7 फ़रवरी | 9 मार्च 2027 | 29 |
| 1449 | 28 जनवरी 2028 | 27 जनवरी | 26 फ़रवरी 2028 | 29 |
| 1450 | 16 जनवरी 2029 | 15 जनवरी | 14 फ़रवरी 2029 | 29 |
| 1451 | 5 जनवरी 2030 | 4 जनवरी | 4 फ़रवरी 2030 | 30 |
| 1452 | 26 दिसंबर 2030 | 25 दिसंबर | 24 जनवरी 2031 | 29 |
| 1453 | 15 दिसंबर 2031 | 14 दिसंबर | 14 जनवरी 2032 | 30 |
| 1454 | 4 दिसंबर 2032 | 3 दिसंबर | 2 जनवरी 2033 | 29 |
| 1455 | 23 नवंबर 2033 | 22 नवंबर | 23 दिसंबर 2033 | 30 |
ये तारीख़ें उम्म अल-क़ुरा कैलेंडर की आधिकारिक मासिक तालिकाओं से ली गई हैं। चाँद देखकर महीना तय करने वाले इलाक़ों में रमज़ान 29 या 30 दिन का होता है, और भारत की तारीख़ें एक दिन आगे खिसक सकती हैं। इस्लामी साल लगभग 354 दिन का होता है, ग्रेगोरियन साल से क़रीब 11 दिन छोटा, इसलिए रमज़ान हर साल लगभग 11 दिन पहले आता है और क़रीब 33 साल में सभी मौसमों से गुज़र जाता है। इसी वजह से 2030 में रमज़ान दो बार शुरू होगा — जनवरी में और फिर दिसंबर के आख़िर में।
रमज़ान में क्या होता है
रमज़ान के रोज़े इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक हैं। रोज़ेदार फ़ज्र (सुबह होने) से पहले सहरी करते हैं और सूर्यास्त पर इफ़्तार तक कुछ नहीं खाते-पीते, पानी भी नहीं। बीमार, सफ़र कर रहे लोग, गर्भवती या दूध पिलाने वाली महिलाएँ और बुज़ुर्ग जो रोज़ा नहीं रख सकते, उन्हें छूट है; कई लोग छूटे रोज़े बाद में पूरे करते हैं।
रातों में तरावीह की ख़ास नमाज़ होती है, और बहुत-से लोग इस महीने में पूरा क़ुरान पढ़ने की कोशिश करते हैं। आख़िरी दस रातों में शब-ए-क़द्र आती है, जिसे क़ुरान के उतरने की रात माना जाता है। भारत में पुरानी दिल्ली, हैदराबाद, लखनऊ, मुंबई के मोहम्मद अली रोड और कोलकाता के ज़कारिया स्ट्रीट जैसे इलाक़ों में इफ़्तार के बाद की रौनक़ और पकवान — हलीम, निहारी, फिरनी, शीर ख़ुरमा — रमज़ान की पहचान बन चुके हैं।
रोज़े का समय और तैयारी
- सहरी और इफ़्तार का समय शहर के अक्षांश और देशांतर पर निर्भर करता है; अपने शहर का स्थानीय समय-सारणी (टाइम टेबल) ही मानें।
- रोज़े की लंबाई मौसम के साथ बदलती है। भारत में गर्मियों के रमज़ान में रोज़ा लगभग 15 घंटे तक का हो जाता है, जबकि सर्दियों में यह क़रीब 12–13 घंटे रहता है।
- सेहत: डायबिटीज़ या ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी हो तो रोज़ा रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें, ख़ास तौर पर दवाओं के समय के बारे में।
रमज़ान के बाद आने वाली ईद-उल-फ़ित्र का काउंटडाउन और बकरीद का काउंटडाउन भी देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रमज़ान 2027 कब से शुरू है?
उम्म अल-क़ुरा कैलेंडर के अनुसार रमज़ान सोमवार, 8 फ़रवरी 2027 से शुरू होगा और पहली तरावीह रविवार, 7 फ़रवरी 2027 की शाम होगी। भारत में चाँद दिखने के अनुसार पहला रोज़ा एक दिन बाद भी हो सकता है।
भारत में रमज़ान सऊदी अरब से एक दिन बाद क्यों शुरू होता है?
भारत में रमज़ान स्थानीय रूप से नया चाँद (हिलाल) दिखने पर शुरू होता है। भारत में चाँद अक्सर सऊदी अरब से एक शाम बाद दिखता है, जबकि उम्म अल-क़ुरा कैलेंडर खगोलीय गणना से पहले से तय होता है।
रमज़ान हर साल अलग तारीख़ पर क्यों आता है?
इस्लामी कैलेंडर पूरी तरह चंद्र कैलेंडर है और उसका साल ग्रेगोरियन साल से लगभग 11 दिन छोटा होता है। इसलिए रमज़ान हर साल क़रीब 11 दिन पहले आ जाता है।
रमज़ान कितने दिन का होता है?
रमज़ान 29 या 30 दिन का होता है। अगला नया चाँद दिखने पर शव्वाल का महीना शुरू होता है और उसके पहले दिन ईद-उल-फ़ित्र मनाई जाती है।
आख़िरी अपडेट: 8 अक्टूबर 2026